A Lone Feel

Loneliness can do so many things to a man.

I do not know them otherwise I’d write them down.

But I do know the feel when there was no one around.

No one to talk with or ask for help.

No one and nothing to feel this void with.

No one to share things with, like this new song I found today.

And today when I sought someone from crowd to call my name like it mattered to him or her.

Absolutely no one when there was so much of free time and the absurdity of its,

Vastness, kicked me to the solid ground.

And it was only when I hit the ground I came to know it was solid.

There have been times I wanted to ask for help.

But something stops ticking, stops my voice as I speak.

Keep your baggage to yourself and carry it.

Alone.

Everyone is. And they do not ask you for any help.

I’ve thought if I stop speaking,

Then, maybe only then,

I will learn how to go through life and things and not let any feel dwindle myself.

I pray and I hope for its meaning to add to life.

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प्रश्न-उत्तर

सुबह है। पंखे के शोर से परे होकर पंछियों की आवाज़ आती है। वे चहचहा रहे है। वे खुश है, दुःखी है, संतुष्ट है, ऊब रहे है या उनकी आवाज़ शोर से अधिक ना है, मैं यह जान ना पाया हूँ। वैसे जरूरत भी ना है, क्योंकि मुझे पंछियों से कोई काम ना पड़ा है, और आगे भी ना पड़ेगा। इसका एक अपवाद कबूतर हो सकता है। किवदंती है कि एक वक्त कबूतर संदेशवाहक पक्षी था। पंछियो की आवाज़ का ज्ञान कबूतर के साथ सार्थक होता। मैं कबूतर से अपने क्रश को अनाम प्रेमपत्र भिजवाता। और जो जन मुझसे सही तरीके बात ना करते, मैं उनके सिर या उनकी गाड़ी पर कबूतर से बीट करवाता।

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यादों का पहला दिन

मैं घर से चल दिया।

मैं गाड़ी में बैठा हूँ। मुझे ज्यादा चीजें याद ना है। बस इतना है कि मैं रास्ते चलते देख रहा हूँ। रास्ते जाने-पहचाने लगते है। कुछ याद भी आता है। मेरा स्कूल, जिसे मैं सालों पहले छोड़ आया था, वह अब भी यही है। गाड़ी से उतरकर, मैं गेट के सामने खड़ा होकर इसे देखता हूँ। मन में यादें आती है। यादों के साथ वर्तमान को मिलाता हूँ। मेरी यादें वही है, बाकी सब बदल गया है।

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