कड़वा मन

अभी-अभी मूवी देखी है। मूवी थी ‘सेफ्टी नॉट गारंटीड।’ मैं खुश था। मित्र का फ़ोन आया। मन खट्टा है।

कॉलेज से नाम काट दिया है। मन में गुस्सा है। बहुत है। पूरे कॉलेज में आखिर इनको मैं ही मिला था। इस प्रकार के विचार उमड़ रहे है। इन सबके बीच एक सत्य है। बड़ा कड़वा है। मैं साल के शुरुआत से अब तक कॉलेज ना गया था, तो नाम कटना लाजमी है।

मैं देखूँ तो पाता हूँ कि किसी को कुछ फर्क ना पड़ा है। खुद के रोग से खुद को ही कष्ट होता है। नीरव मोदी रुपये लेकर उड़ गया। ये कष्ट उसका नही पर देश का है। पर मुझे ना होता है। अभी बस मन कड़वा है। रोग मुझे मालूम है, पर उसकी दवा का ना पता है।

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चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है

चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है,
अब सामने आकर तू क्या बताती है।

मैं सदा तेरे इस गुण के प्रभाव में रहा,
किस सरलता से तू कठिन बातें कह जाती है।

तुम ना तो खुश दिखते हो, ना दुःखी
ये कैसी मुस्कान चेहरे पर तुमने पाली है।

मेरी आँखें नम ना हुई है,
तुम्हे ग़लतफहमी हुई है।

जाते-जाते जहाँ बसो वहाँ का पता लिख जाना,
आज से उस पते कदमों को मनाही है।

अब तो परदे कर लो खिड़कियों पर,
सब की ख़ुशी सब से देखी ना जाती है।

खाली हुआ गिलास, थोड़ी मय तो डालो
रुदन बाद में छेड़ेंगे, अभी विरह कमसिन है।