These broken bits do not tell any story

These broken bits do not tell any story.

Say they do not get well along with each other.

They murmur quietly to them as they go with the day.

Everything is uncertain and unanswered.
They and the Gods seem mutually done with each other.

This jail has got their cruel comfort, confined.

They don’t have the hero who can save them.

Save for the hope which slogs them day and night.
Their simple faces do not have the crux of a good life.

The essence is grief has not captured them.

But the regularity of their common notions fails them,

As to why they can’t tell from need and want. 

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सफेद रंग की चीजें अब लाल होती है

सफेद रंग की चीजें अब लाल होती है,
मेरे देस में मरे बाद क्रांति होती है।

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उम्मीद लेकर एक भीड़ उनके दर जायेगी

उम्मीद लेकर एक भीड़ उनके दर जाएगी,
उम्मीद देकर आश्वाशन लिए वापस आएगी।

कसकर पकड़ना एक-दूसरे को आज,
तूफ़ान में अकेली अपनी कश्ती होगी।

इनकी जमात के किसी को हमदर्द ना समझना तुम,
अब भेडियो से फ़क़त खाल ना ओढ़ी जायेगी।

रोने-चिल्लाने से आवाज अब ना सुनाई देती है,
गर मरे तो शायद बात दिल्ली जायेगी।

उम्मीदों का भार मन-भवन जर्जर करता आया है,
जे त्यागे तो पल में जिंदगानी बिखरेगी।

क्या कहलाता हूँ (Kya Kehlata Hoon)

तुम्हारी बातों में जाने क्या कहलाता हूँ,
बात सुनो, मैं सच बतलाता हूँ।

अपनी जलायी आग पे हाथ सेंकते हो,
मैं अगर बुझाऊँ तो बागी हो जाता हूँ।

हाथ-पाँव कीचड़ में सने रहते है तुम्हारे,
दामन साफ़ रहे मैं शहीद हो जाता हूँ।

मैं लूटता-पिटता खेत से बाजारों तक,
प्राण देकर तुम्हारा बेचारा किसान कहलाता हूँ।

तुम दुनिया ख़त्म करके भी महान हो जाते है,
तुम्हारे कहे इंसान मारके कौनसा इंसान रह जाता हूँ।

और क्या करू (Aur Kya Karoon)

आज कुछ और सैनिक मारे गए
कल कुछ और मारे जायेंगे
परसो और भी ज्यादा मारे जायेंगे
हम आज कड़ी निंदा करते है
और कल भी कर देंगे।

मैं जनता हूँ
इसका एक हिस्सा हूँ
नया खून हूँ जोकि उबलता और खौलता है
मैं सोशल-नेटवर्किंग साइट्स पे निंदा कर दूंगा
बड़े-बड़े वाक्यो में तुम्हारी मौत पर शौक जताऊंगा
इससे निपटने के दस तरीके बता दूंगा
सरकार की निंदा कर दूंगा
पाकिस्तान की माँ-बहन कर दूंगा
मृतको को रिप-रिप कर दूंगा
मेरे मोहल्ले की चाय की दूकान पर
रोज शाम को बुढ़ों और जवानो की बैठक लगती है
वहां मैं बैठकर कुछ तगड़ा सा वाक्य बोलकर
अपना जोर मनवा लूँगा
मैं मोमबत्ती लेके सड़को पर निकलूंगा
मैं ए०सी० वाली दुकानों पर बैठके कॉफ़ी गटकूँगा
और अंग्रेजी में दो-चार चबड़-चबड़ कर दूंगा
मैं न्यूज़ चैनल्स पे दुनिया भर की बकचोदी सुनूंगा
और अंत में उन्हें चुतिया कहकर अपना गुस्सा व्यक्त कर दूंगा
मैं चुनावी रैलियों और सम्मेलनों में जाऊंगा
नेता कोई भाषण देगा और तुम्हारी बहादुरी का जिक्र करेगा
मैं गदगद होकर तालियां ठोकुंगा
मैं कल सुबह अपने कुत्ते और स्वयं को घुमाने निकलूंगा
कोई मिला तो हम दोनों साथ मिलकर
अपनी व्यस्तता से समय निकालकर
तुम्हारे ऊपर चर्चा जरूर करेंगे
मैं कवि भी हूँ
एक कोने में बैठकर कुछ तुकबंदी लगाउँगा
कुछ लंबी-लंबी पंक्तिया तुम पर लिख लिख दूंगा
फिर उन्हें तुम्हारे नाम पर कही छपवा दूंगा या बोलूंगा
उस पल मेरी छाती का फुलाव देखना
और सबकी तालियाँ पिटवाऊंगा
उस पल मुझे और मेरे मैं को अच्छा लगेगा
मैं तुम्हारे लिए एक स्मारक बनवाऊंगा
उसके उद्घाटन के लिए किसी चूतिये नेता को बुलाऊंगा
फिर उसकी बकैती सहन करके उसका पक्ष पाउँगा
खैर मैं बहुत कुछ कर दूँगा
तुम्हे पता नहीं है
जनता सोया हुआ शेर है
जागेगा तो फाड़ डालेगा सब कुछ।

साधों,
मैं बहुत कुछ कर दूंगा
पर मुझे आज ना पता चला
कि ये जो जवान मरते है
ये कौन होते है?
किस बिजनेसमैन या नेता के लड़के होते है
देहात या शहर
कहाँ से निकल कर आते है
क्यों करते है ये वो नौकरी
जिसमे इन्हें साफ़ पता होता है
की मौत सदा इनके साथ चलेगी
क्या चलता है इनके मन में
की बस ये चलते जाते है
किसी को इनका पता ना चलता है
क्या किया क्या करना पड़ता है
कब इनके प्राण छूट गए
एक गोली ने इन्हें एक आदमी से एक स्टेटिस्टिक्स बना दिया
भाई कौन होते है हे लोग
इनका घर परिवार ना होता क्या
कोई पत्नी प्रेमिका या बच्चे
बस चले जाते है
चले जाते है
और एक कड़ी निंदा के मोहताज रह जाते है।