Sick

It is 11 P. M. I am up. Sleep is nowhere.

This world. I don’t know what kind of a place this was, and has become. I was reading newspaper, the Hindustan Times. I saw this news and now mind is sick.

I am not sure of the feeling I have right now. It’s mixed. There’s disgust, rage, shame and a lot more I can’t recognise.

I want to write long paragraphs, condemning these horrible acts. I can’t. I am numb with an inability to act on anything specific.

Advertisements

मुझे भूख लगी है

मैं भूखा हूँ। कितना वक़्त बीता, मुझे पता। तब सब काला था और कुछ नही दिखता था। अब सब दिख रहा है। मैं अब भी भूखा हूँ।

बड़े डब्बे में भी कुछ ना था। मैंने मुँह मारा था। मेरे साथी ने भी देखा था। बड़ी काली शोर वाली वही थी। उसमे खाना होता है। मैं नही गया। मैं भूखा था। मैं बैठा था। मेरा एक कोना था। मेरे पास में वे मुँह चला रहे थे। कुछ खा रहे थे। मैं देख रहा था। मैं खाने के लिए बोला। उनमे से एक उठा। मुझे खाना मिलना था। पर वो चिल्लाया। मैं भाग निकला। वो हंस रहा था।

मैं पत्थर वाली जमीन से भागा। मैं रेत पर गया। पैर गर्म होते थे। मैं कोने में गया। मैं पानी में बैठ गया। मुझे भूख लगी थी। मैं वहाँ रहा। आते-जाते वो मुझे देखते। मुझे भूख लगी थी। मैंने नहीं बोला। वो फिर चिल्लाते। मुझे भागना होता। मुझे भूख लगी थी। मैं वही रहा। मैंने आँखें बंद कर ली। मैं सो गया।

मैं उठा। मैं गली में चला। अब कुछ नही दिखता था। वे खाना दे देते थे। आज कोई नहीं था। मुझे खाना ना मिला। मुझे भूख लगी थी। मैं गली में चलता रहा। कुछ नही दीखता था।

एक जगह दीखता था। वहाँ वो थे। बहुत थे। मेरे साथी भी थे। खाना मिलेगा। मैं अंदर गया। वहाँ वो थे। मैं भूखा था। सब दिख रहा था। गली जैसा नही था। खाना भी था। गली में कोई नही था। वो यहाँ थे। यहाँ खाना था। मुझे भूख लगी थी। मैं कोने में गया। वहां खाना पड़ा था। मेरे साथी खा रहे थे। मुझे भूख लगी थी। मैंने खाना खाया। वे नही चिल्लाये। मैंने खाना नही माँगा। मैंने कोने मे खाया। गली में वो नही थे। वो यहाँ थे। वो भी खाना खाते थे। वे नही चिल्लाये। मैं अब भूखा नही था।