आज के दिन में बदलाव की उम्मीद करता हूँ

आज के दिन में बदलाव की उम्मीद करता हूँ,
सरकार अर्जी सुने, भगवान से फरियाद करता हूँ।

जानता हूँ की चाशनी में डूबा फरेब है उनका,
हैरान हूँ हर बार किस तरह विश्वास करता हूँ।

उनके तलवे चाटकर नौकरशाही को उभरते देखा मैंने,
इस उम्मीद में रोज अपनी जीभ की सफाई करता हूँ।

मेरा ‘आम’ शब्द भी छीन लिया मुझसे पल में,
ये कैसे हुआ, सोचकर रोज हैरान होता हूँ।

लगता है मेरा रब रूठ गया मुझसे उस दिन का,
जब से मैं अपनी अर्जी सुनी जाने की फरियाद करता हूँ।

दिन ढले तो शुरुआत हुई

दिन ढले तो शुरुआत हुई,
अकेलेपन में अपनी तलाश हुई।

एक सड़क देखी, मोधि पड़ी जमीन पर,
उस पर चलकर कितनों को मंजिल प्राप्त हुई।

मंजिल पहुँचोगे अवश्य, पर दिनों की बात ना करो,
पल ऐसा देखना जिसमे तुम्हारी साँसे इसकी सौगात हुई।

मेरे साथी चुपचाप नजर आये आज मुझे,
शोर करो कुछ कि शान्ति अब नापंसद हुई।

एक कोने में बैठके देखूँ जिंदगी पलों में कटती,
बेबस मैं बेचारा, बेरोजगारी मेरी माशूक हुई।

आज दुनिया का जादू हटाया जाए

आज दुनिया का जादू हटाया जाए,
आज इस शाम की कदर हो जाए।

नारों से मोहित जनता रस्ता देखे बहारों का,
बेहतर हो अगर क़यामत का इंतजार किया जाए।

खुदा, इंसान, शैतान; क्या बने फिरते हो,
तुम बिको औकात-अनुसार जे रूपया रब कहाए।

भूला दो गाय, सूअर, बकरो को,
मुद्दा इंसान है, इनपर विचार बतलाएं।

क्या पर्दे, हिजाब, नक़ाब करे हो,
हटाओ तो चेहरा नजर आये।

चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है

चिर पहले सुना कि तेरी शादी आती है,
अब सामने आकर तू क्या बताती है।

मैं सदा तेरे इस गुण के प्रभाव में रहा,
किस सरलता से तू कठिन बातें कह जाती है।

तुम ना तो खुश दिखते हो, ना दुःखी
ये कैसी मुस्कान चेहरे पर तुमने पाली है।

मेरी आँखें नम ना हुई है,
तुम्हे ग़लतफहमी हुई है।

जाते-जाते जहाँ बसो वहाँ का पता लिख जाना,
आज से उस पते कदमों को मनाही है।

अब तो परदे कर लो खिड़कियों पर,
सब की ख़ुशी सब से देखी ना जाती है।

खाली हुआ गिलास, थोड़ी मय तो डालो
रुदन बाद में छेड़ेंगे, अभी विरह कमसिन है।

उम्मीद लेकर एक भीड़ उनके दर जायेगी

उम्मीद लेकर एक भीड़ उनके दर जाएगी,
उम्मीद देकर आश्वाशन लिए वापस आएगी।

कसकर पकड़ना एक-दूसरे को आज,
तूफ़ान में अकेली अपनी कश्ती होगी।

इनकी जमात के किसी को हमदर्द ना समझना तुम,
अब भेडियो से फ़क़त खाल ना ओढ़ी जायेगी।

रोने-चिल्लाने से आवाज अब ना सुनाई देती है,
गर मरे तो शायद बात दिल्ली जायेगी।

उम्मीदों का भार मन-भवन जर्जर करता आया है,
जे त्यागे तो पल में जिंदगानी बिखरेगी।

क्या कहलाता हूँ (Kya Kehlata Hoon)

तुम्हारी बातों में जाने क्या कहलाता हूँ,
बात सुनो, मैं सच बतलाता हूँ।

अपनी जलायी आग पे हाथ सेंकते हो,
मैं अगर बुझाऊँ तो बागी हो जाता हूँ।

हाथ-पाँव कीचड़ में सने रहते है तुम्हारे,
दामन साफ़ रहे मैं शहीद हो जाता हूँ।

मैं लूटता-पिटता खेत से बाजारों तक,
प्राण देकर तुम्हारा बेचारा किसान कहलाता हूँ।

तुम दुनिया ख़त्म करके भी महान हो जाते है,
तुम्हारे कहे इंसान मारके कौनसा इंसान रह जाता हूँ।

और क्या करू (Aur Kya Karoon)

आज कुछ और सैनिक मारे गए
कल कुछ और मारे जायेंगे
परसो और भी ज्यादा मारे जायेंगे
हम आज कड़ी निंदा करते है
और कल भी कर देंगे।

मैं जनता हूँ
इसका एक हिस्सा हूँ
नया खून हूँ जोकि उबलता और खौलता है
मैं सोशल-नेटवर्किंग साइट्स पे निंदा कर दूंगा
बड़े-बड़े वाक्यो में तुम्हारी मौत पर शौक जताऊंगा
इससे निपटने के दस तरीके बता दूंगा
सरकार की निंदा कर दूंगा
पाकिस्तान की माँ-बहन कर दूंगा
मृतको को रिप-रिप कर दूंगा
मेरे मोहल्ले की चाय की दूकान पर
रोज शाम को बुढ़ों और जवानो की बैठक लगती है
वहां मैं बैठकर कुछ तगड़ा सा वाक्य बोलकर
अपना जोर मनवा लूँगा
मैं मोमबत्ती लेके सड़को पर निकलूंगा
मैं ए०सी० वाली दुकानों पर बैठके कॉफ़ी गटकूँगा
और अंग्रेजी में दो-चार चबड़-चबड़ कर दूंगा
मैं न्यूज़ चैनल्स पे दुनिया भर की बकचोदी सुनूंगा
और अंत में उन्हें चुतिया कहकर अपना गुस्सा व्यक्त कर दूंगा
मैं चुनावी रैलियों और सम्मेलनों में जाऊंगा
नेता कोई भाषण देगा और तुम्हारी बहादुरी का जिक्र करेगा
मैं गदगद होकर तालियां ठोकुंगा
मैं कल सुबह अपने कुत्ते और स्वयं को घुमाने निकलूंगा
कोई मिला तो हम दोनों साथ मिलकर
अपनी व्यस्तता से समय निकालकर
तुम्हारे ऊपर चर्चा जरूर करेंगे
मैं कवि भी हूँ
एक कोने में बैठकर कुछ तुकबंदी लगाउँगा
कुछ लंबी-लंबी पंक्तिया तुम पर लिख लिख दूंगा
फिर उन्हें तुम्हारे नाम पर कही छपवा दूंगा या बोलूंगा
उस पल मेरी छाती का फुलाव देखना
और सबकी तालियाँ पिटवाऊंगा
उस पल मुझे और मेरे मैं को अच्छा लगेगा
मैं तुम्हारे लिए एक स्मारक बनवाऊंगा
उसके उद्घाटन के लिए किसी चूतिये नेता को बुलाऊंगा
फिर उसकी बकैती सहन करके उसका पक्ष पाउँगा
खैर मैं बहुत कुछ कर दूँगा
तुम्हे पता नहीं है
जनता सोया हुआ शेर है
जागेगा तो फाड़ डालेगा सब कुछ।

साधों,
मैं बहुत कुछ कर दूंगा
पर मुझे आज ना पता चला
कि ये जो जवान मरते है
ये कौन होते है?
किस बिजनेसमैन या नेता के लड़के होते है
देहात या शहर
कहाँ से निकल कर आते है
क्यों करते है ये वो नौकरी
जिसमे इन्हें साफ़ पता होता है
की मौत सदा इनके साथ चलेगी
क्या चलता है इनके मन में
की बस ये चलते जाते है
किसी को इनका पता ना चलता है
क्या किया क्या करना पड़ता है
कब इनके प्राण छूट गए
एक गोली ने इन्हें एक आदमी से एक स्टेटिस्टिक्स बना दिया
भाई कौन होते है हे लोग
इनका घर परिवार ना होता क्या
कोई पत्नी प्रेमिका या बच्चे
बस चले जाते है
चले जाते है
और एक कड़ी निंदा के मोहताज रह जाते है।