Why Am I Single

आजकल रात को कई बार नींद खुल जाती है। उठकर एक लंबी उबासी लेता हूँ। आसपास देखता हूँ तो पाता हूँ की सन्नाटा पसरा है।
एक दोस्त को जब ये बात बताई तो उसने  कहा कि भाई तुम्हे प्यार हो गया है। एक पल हमने ये सुना, दूसरे पल उसको दुत्कारा। पर तीसरे पल मैं खुद सोच में पड़ गया। बात में सत्यता कुछ नहीं तो झूठ भी कुछ नहीं है।

प्यार। इस मर्ज की बात करे तो अगर गीत, संगीत और उनसे जुडी चीजो की देखे तो आजकल का युवा इससे पीड़ित है। जो इससे पीड़ित नहीं है वो इससे होना चाहते है। पर चूँकि लेख में मुद्दा हमने उठाया है, तो हम ही बात करेंगे।

आजतक हमसे प्यार ना पाया गया। इसको पाने के लिए प्रचलन में जितने तरीके है, सबको आजमाकर देखा गया था। ज्यादातर हमारे सन्दर्भ में नाकामयाब रहे तो कुछ-एक चलन से बाहर हो चुके थे। जैसे की पुराने वक़्त में जब बन्दा किसी लड़की के साथ टकराता था, तो लड़की के हाथों में से पन्ने-किताबें पद जाते थे और जब वो दोनों उन्हें समेटते थे, तब उनकी नजरें चार हो जाती थी और फिर धीरे-धीरे उनमे प्यार पनप जाता था। हमने इस नुस्ख़े को आजमाने की जुर्रत की। किताबें पड़ी तो सही पर जब बटोरने का समय आया तो तो हमे होश नहीं और हम सीधे चले आये। पीछे से स्टुपिड इडियट जैसा भी कुछ सुना। जब ये वाकया हुआ, तब हमारा दूसरे प्रचलित नुस्खों से भी भरोसा उठ गया और हमने उन्हें तुरंत प्रभाव के साथ त्याग दिया।

जब पुराने प्रचलित नुस्खों से हमारे उद्देश्य की पूर्ती ना हुई, तब हमने नए सिरे से सोचना शुरू किया। पुरानी बातों से कुछ मिला ना मिला, पर सबक जरूर मिला था।

नए सिरे से सोचने पर पहले लगा की 20 बरस तक भी हमें एक कन्या के साथ का सौभाग्य ना मिला, तो इसके पीछे जरूर ना जरूर कायनात का हाथ है। कायनात की नहीं तो कम से कम हमारे सदा ज्वलनशील पड़ोसियों का तो हाथ जरूर है।

नए सिरे से सोचा तो कुछ ना मिला। देखा तो कुछ-कुछ समझ में आया। हरियाणा में मेल-फीमेल सेक्स रेश्यो सदा ही कम रहा है। हालांकि बीते वक़्त में इसमें कुछ सुधार आया है, पर फिर भी चिंताजनक है। याददाश्त टटोल कर पाया की हरियाणा में शायद 1000 लड़को पर 861 लड़कियां थी। यानी की 139 लड़के रंडुए। उन 139 में से मैं भी एक।

मुझे रंडुआ बनाने में कायनात का हाथ है। साथ ही ज्वलनशील पड़ोसियों का भी। शुरुआत से ही उपरवाले से शिकायत थी की उसने मेरे लिए किसी को नहीं बनाया। अब पाता हूँ क़ि उपरवाले ने अपना काम सही किया। ये तो नीचेवाले है जो स्यापा कर बैठे। कोख में ही मार डाला होगा बेचारी को। और साल-दर-साल ना जाने कितनी बेचारियां हुई होंगी। पूरी वजह अब समझ में आई।

बात अब हम मान चुके है की रंडुए ही रहेंगे। पर फिर भी दिल है की मानता ही नहीं है। हर एक खूबसूरत चेहरे को देखते ही खुश हो जाता है। मानो कुछ तलाशता है। शायद दिल को फैक्ट्स समझ में नहीं आते है। इसे अभी भी लगता है कि ये 139 नहीं, उन 861 बन्दों में से एक है।

खैर जब तक ना मिले, हम ढूँढ़ते रहेंगे। बड़ी अच्छी चीज बताया है इश्क़ को।

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